स्कूलों को पानी का भी रखना होगा हिसाब- CBSE


मुंबई
मुंबई में स्कूलों को अब किताबों के साथ पानी का भी हिसाब रखना होगा। केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) ने स्कूलों में होने वाली पानी की बर्बादी रोकने के लिए नए दिशानिर्देश जारी किए हैं। इसके तहत तीन वर्ष में अनिवार्य रूप से स्कूलों को जल सक्षम बनने का आदेश दिया गया है। साथ ही जल प्रबंधन नीति लागू कर नियमित रूप से जल ऑडिट कराने को कहा गया है। इन दिशानिर्देशों में कहा गया है कि स्कूलों को जल समस्या और इसके लिए उपयोग में आने वाले उपकरणों को दुरुस्त बनाना चाहिए तथा सेंसरयुक्त ऑटोमैटिक नल, व्यवस्थित टैंक स्थापित करना चाहिए। इसके साथ ही नियमित रूप से लीकेज की जांच करानी चाहिए एवं उनके रखरखाव की ठोस व्यवस्था करनी चाहिए। स्कूलों में कैंटीन के साथ प्रयोगशाला और खेल के मैदान के रखरखाव के लिए रोजाना हजारों लीटर पानी का इस्तेमाल होता है।

पाइप लाइन में लीकेज और नल खराब होने की वजह से स्कूलों में पानी की बर्बादी के कई मामले सामने आते रहते हैं। ऐसे मामलों पर लगाम लगाने और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की जल बचाव मुहिम से विद्यार्थियों को जोड़ने के लिए यह निर्णय लिया गया है।

स्कूलों में बनेगी जल प्रबंधन समिति
बोर्ड ने स्कूलों को स्कूल जल प्रबंधन समिति का गठन करने को कहा है। समिति के सदस्य मैनेजमेंट प्रतिनिधि, शिक्षक, विद्यार्थी और अभिभावक होंगे। समिति जल के उपयोग पर नजर और इसकी समीक्षा का काम करेगी। बोर्ड के एक अधिकारी के अनुसार, स्कूलों के पास जल सक्षम बनने के अलावा और कोई विकल्प नहीं है। स्कूलों में प्रतिदिन काफी मात्रा में पानी की खपत होती है, जो पीने के उद्देश्य के साथ कैंटीन, प्रयोगशाला, खेलों, मैदान आदि में उपयोग में लाई जाती है। ऐसे में स्कूलों को जल संरक्षण के महत्व को समझने की जरूरत है।

अच्छी पहल
राष्ट्रीय स्वतंत्र स्कूल अलायंस के संस्थापक सदस्य भरत मलिक ने बोर्ड के आदेश का स्वागत किया है। मलिक के अनुसार, विद्यार्थियों को इस मुहिम में शामिल करना आवश्यक है। महानगर के कई स्कूलों ने पहले से ही वाटर ट्रीटमेंट प्लांट का इस्तेमाल करना शुरू कर दिया है।

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शहरों में पानी की गंभीर समस्या
नीति आयोग की एक रिपोर्ट के अनुसार दिल्ली, बेगलुरू, चेन्नै, हैदराबाद सहित देश के 21 शहरों में 2020 तक भूजल की स्थिति काफी गंभीर हो जाएगी।

रिपोर्टर

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